प्रजामण्डल आंदोलन – Prajamandal Movement

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प्रजामण्डल आंदोलन – Prajamandal Movement

प्रजामण्डल आंदोलन - Prajamandal Movement
प्रजामण्डल आंदोलन – Prajamandal Movement

रियासतों में कुशासन को समाप्त कर उत्तरदायी शासन की स्थापना करने , राजनीतिक जनजागृति पैदा करने, नागरिको के मौलिक अधिकारों की बहाली करने के उद्देश्य से किये गये आंदोलन प्रजामण्डल आंदोलन के नाम से जाने जाते हैं। 

1938ई. के कांग्रेस के हरिपुर अधिवेशन के बाद देशी रियासतों में चल रहे संघर्ष को कांग्रेस ने अपना समर्थन दिया 

1927 ई. मं बम्बई में अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद् की स्थापना की गयी थी, जिसकी रियासती इकाइयों को प्रजामण्डल के नाम से जाना गया।

मारवाड़ सेवा संघ

1920ई. में जयनारायण व्यास व चांदमल सुराणा द्वारा मारवाड़ सेवा संघ का गठन किया गया जिसका उद्देश्य जना जागृति पैदा कर मारवाड़ रियासत में उत्तरदायी शासन की थापना करवाना था। मारवाड़ सेवा संघ, राजस्थान सेवा संघ की एक इकाई थीं

तोल आंदोलन

1920-21 ई में मारवाड़ रियासत में ब्रिटिश भारत की तर्ज पर सौ तोले के स्थान पर 80 तौले का एक सेर कर दिया गया, मारवाड़ सेवा संघ के कार्यकर्ताओं द्वारा इसके खिलाफ आंदोलन चलाया गया, अतः सरकार को अपना निर्णय बदलना पड़ा। मारवाड़ यूथ लीग:- 10 मई 19831 ई. को जयनारायण व्यास द्वारा मारवाड़ रियासत में इस संगठन की स्थापना की गयी।

चण्डावल घटना

मई 1942 ई. में चण्डावल (पाली) नामक स्थान पर मारवाड़ प्रजा परिषद के कार्यकर्ताओं की एक सभा पर रियासती सैनिलकों द्वारा हमला किया गया फलस्वरूप कई कार्यकर्ता घायल हो गये।

डाबड़ा काण्ड

13 मार्च 1947 ई. को डाबड़ा (नागौर) नामक स्थान पर मारवाड़ प्रजामंडल के कार्यकर्ताओं की एक सभा मोतीलाल तेजावत नामक एक किसान के घर पर हो रही थी। डीडवाना परगने के जागीरदार द्वारा कार्यकर्ताओं पर हमला करवाया गया। प्रजामंडल के मुख्य नेता चुन्नीलाल समेत 12 लोग मारे गये। मथुरादास माथुर घायल हो गये।

र्वहितकारिणी सभा :- 1913 ई. में बीकानेर प्रजामंडल के कार्यकर्ताओं स्वामी गोपालदास व कन्हैया लाल द्वारा चुरू में इसकी स्थापना की गयी इसके तहत बालिका शिक्षा के लिए पुत्री पाठशाला तथा दलित शिक्षा के लिय कबीर पाठशालाएं खोली गयी।

बीकानेर षडयंत्र अभियोग :- बीकानेर महाराजा गंगासिंह जब दूसरे गोलमेज सम्मेलन (1931) में भाग लेने के लिये लंदन गये तब वहां पर बीकानेर के कार्यकर्ताओं द्वारा ‘बीकानेर दिग्दर्शन’ (बीकानेर में कुशासन को बताने वाली) नामक पत्रिका बटवायी गयी। इसके दण्डस्वरूप स्वामी गोपालदास, चन्दनमल बहड़, सत्यनारायण सर्राफ बीकाने षडयंत्र मुकदमा चलाया गया।

जेन्टलमैन एग्रमेन्ट :- भारत छोड़ो आंदोलन के समय सितम्बर 1942 में जयपुर प्रजामंडल के नेता हीराला शास्त्री व जयपुर के प्रधानमंत्री मिर्जा ईस्माइल के मध्य एक समझौता हुआ, जिसे Gentlemen Agreement कहा जाता हैं, इसके तहत यह तय किया गया कि जयपुर रियासत अंग्रेजों की जन-धन से सहायता नहीं करेगी। प्रजामण्डलके कार्यकर्ता शांतिपूर्ण विरोध कर सकते हैं तथा कार्यकत्ताओं की गिरफ्तारी नहीं की जायेगी। राज्य में उत्तरदायी शासन स्थापित करने के प्रयास किये जायेंगे। जयपुर प्रजामडंल भारत छोड़ो आंदोलन में भाग नहीं लेगा

आजादमोर्चा – जयपुर प्रजामंडल के द्वारा Quit India movement में भाग नहीं लेने के हीरालाल शास्त्री के निर्णय से नाराज कार्यकर्ताओं ने बाबा हरिश्चन्द्र के नेतृत्व में आजाद मार्चा का गठन किया तथा भारत छोडो आंदोलन में भाग लिया, जिसके अन्य नेता रामकरण जोशी, दौलतमल भंडारी व गुलाबचन्द कासलीवाल थे। तसीमो कांड:- अप्रैल 1947 ई. में धौलपुर प्रजामण्डल के तसीमो नामक गांव में पुलिस फायरिंग की गयी, जिसमें पंचमसिंह व छतरसिंह दो कार्यकर्ता शहीद हो गये।

रास्तापाल घटना :- वागड़ सेवा संघ द्वारा संचालित विद्यालयों को बंद करवाने गये डूंगरपुर राजय के सैनिकों कने रास्तापाल नामक गांव में विद्यालय बंद नहीं करने पर अध्यापक नानाभाई की गोली मारकर हत्या कर दी तथा दूसरे अध्यापक सेगांभाई को गाड़ी के पीछे बांधकर घसीटा गया, 13 वर्षीय भील बालिका कालीबाई अध्यापक सेंगाभाई को बचाने के प्रयास में पुलिस की गोलियों की शिकार (शहीद) हो गयी। (19 जून 1947) डूंगरपुर जिले में गेप सागर के तट पर काली बाई की प्रतिमा लगी हुयी हैं। राजस्थान सराकर बालिका शिक्षा के क्षेत्र में बालिका पुरस्कार प्रदान करती हैं।

कथटराथल सम्मेलन – 25 अप्रैल 1934 ई. को कटराथल (सीकर) नामक स्थान पर महिलाओं से दुर्व्यवहार के खिलाफ किशोरी देवी (किसान नेता हरलालसिंह) के नेतृत्व में 10000 महिलाओं का एक सम्मेलन हुआ इसमें भरतपुर के किसान नेता ठाकुर देशराज की पत्नी उत्तमादेवी ने भी भाग लिया था।

कूदंन हत्याकांड – अप्रैल 1934ई. में कूदन (सीकर) नामक गांव में पुलिस अधिकारी कैप्टन वेब द्वारा किसानों पर फायरिंग कर दी गई, इसमें कई किसान मारे गये, इस हत्याकांड की चर्चा लदंन के House of Commons में भी हुयी थी।

महत्वपूर्ण सगंठन

1. देश हितैषिणी सभा – मेवाड़ रियासत में विवाह सम्बन्धी सुधार करने के उद्देश्य से 2 जुलाई 1877ई. को महाराणा सज्जनसिंह की अध्यक्षता में समाज सुधार संगठन बनाया गया, जिसके उद्देश्य विवाह के समय होने वाले खर्च को कम करना,ख बहु विवाह निषेध करना था। समाज सुधार के परिप्रेक्ष्य में किसी रियासत में हुआ पहला प्रयास कवि राजा श्यामलदास (वीर विनोद के लेखक) इसके सदस्य थे।

2. वाल्टरकृत राजपूत हिकारिणी सभा – जनवरी 1889 ई. में A.G.G. वाल्टर ने राजपूतों में विवाह सम्बन्धी सुधार करने के लिए इस सभा का गठन किया जिसके उद्देश्य:1. विवाह योग्य आयु निश्चित करना (लड़के के लिए 18, लड़की 14 वर्ष) 2. बहु विवाह बंद करना। 3. टीका व रीत बंद करना।

3. राजपूताना मध्य भारत सभा – 1918ई. में जमनालाल बजाज द्वारा दिल्ली के चादंनी चौक में मारवाड़ी पुस्तकालय में इस सभा का गठन किया गया जिसका मुख्यालय अजमेर (बाद में) बनाया गया। विजयसिंह पथिक, गणेश शंकर विद्यार्थी, चांदकरण शारदा आदि लोग भी इससे जुड़े हुये थे।

4. राजस्थान सेवा संघ :- 1919 ई. में विजयसिंह पथिक द्वारा वर्धा (महाराष्ट्र) में इसका गठन किया गया था। रामनारायण चौधरी व हरिभाई किंकर इस संघ के मुख्य कार्यकर्ता थे। राजस्थान सेवा ने किसान आंदोलनों (बूंदी, शेखावाटी आदि) में अपनी मुख्य भूमिका निभाई राजस्थान सेवा संघ का मुख्यालय अजमेर में बनाया गया।

5. जीइन कुटीर :- 1927 ई. में वनस्थली (टोंक) में हीरालाल शास्त्री द्वारा इस संस्था का गठन किया गया, जिसका उद्देश्य एक ऐसे ग्राम समाज का निर्माण करना था, जो पूर्णतः स्वावलम्बन पर आधारित हैं।

6. हिन्दी साहित्य समिति – 1912 ई. में इस संस्था की स्थापना की गयी थी, इसके तहत 1927ई. में भरतपुर में विश्व हिन्दी सम्मेलन का आयोजन करवाया गया जिसके अध्यक्ष गौरी शंकर हीराचन्द औझा थे इस सम्मेलन में रवीन्द्र नाथ टैगोर व जमना लाल बजाज ने भी भाग लिया था। (भरतपुर में किशनसिंह ने हिन्दी को राष्ट्रभाषा घोषित कर दिया था।) 

7. अखिल भारतीय हरिजन संघ – 1932 ई. में गांधी जी ने घनश्यामदास बिड़ला के नेतृत्व में अखिल भारतीय हरिजन संघ की स्थापना की थी, इसकी राजपूताना इकाई के अध्यक्ष हरविलास शारदा थे। 

8. वीर भारत सभा – राजस्थान में क्रांतिकारी गतिविधियों के प्रयास के लिये 1910 में केसरीसिंह बारहठ व राव गोपालसिंह खरवा द्वारा इसका गठन किया गया था, विजयसिंह पथिक भी इससे जुड़े हुये थे। यह संस्था अभिनव भारत (वीर सावरकर) की प्रान्तीय इकाई थी।

प्रजामण्डलों का राजनैतिक व सामाजिक योगदान

राजनैतिक योगदानसामाजिक योगदान
राजनीतिक चेतना जागृतमहिलाओं की स्थिति में सुधार
राष्ट्रीय चेतना का संचारशिक्षा का प्रचार-प्रसार
उत्तरदायी सरकारें की स्थापना आदिवासियों के कल्याण के लिये सुधार कार्यक्रम
एकीकरण का मार्ग प्रशस्तहरिजन उद्धार
राष्ट्रीय एकता को बलबेगार प्रथा का उन्मूलन
सामन्तशाही समाप्तसामाजिक सुधार
राष्ट्रीय आंदोलनों को बल
Narayan Teli

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